JAC 10th Hindi Model Paper Answer 2026: Jharkhand Academic Council (JAC) has released the class 10th Hindi model paper 2026. JAC class 10th Hindi model paper 2026 contains the format of questions coming in the board exam 2026, which makes it easier for the students to prepare for the exam. Therefore, our team has prepared the answer of JAC class 10th Hindi model paper 2026 which is based on the question bank released by JAC. You can download JAC class 10th Hindi model paper answer 2026 PDF in jacupdate.in website. JAC class 10th Hindi model paper answer 2026 PDF download link is given below, which you can easily download.
| झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), राँची प्रतिदर्श प्रश्न पत्र / MODEL QUESTION PAPER सत्र: 2025-26 |
| कक्षा: 10 | विषय: हिन्दी ‘ए’ | पूर्णांक: 80 | समय: 3 घंटे |
निर्देश / Instructions:
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खण्ड – क (अपठित बोध, कविता, वाक्य-वैकरण, पाठ-संग्रह)
अपठित गद्यांश:
पुस्तकें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती हैं। वे हमें ज्ञान, प्रेरणा और मनोरंजन प्रदान करती हैं।
पढ़ने की आदत न केवल हमारी शब्द–संपदा को बढ़ाती है, बल्कि हमारी सोच को भी गहराई देती है।
आधुनिक डिजिटल युग में लोग मोबाइल और कंप्युटर पर अधिक समय बिताने लगे हैं, जिससे पढ़ने की आदत धीरे-धीरे कम हो रही है।
यदि हम प्रतिदिन थोड़ा समय पुस्तकों के सार्थक बिताएँ तो यह हमारी मानसिक क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करेगा
और हमें जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करेगा।पढ़ने से हमारी कल्पनाशक्ति का विकास होता है और हम नए विचारों को अपनाने के लिए तैयार रहते हैं।
प्रश्न:
1. पुस्तकों को मनुष्य का सबसे अच्छा मित्र क्यों कहा गया है?
2. डिजिटल युग में पढ़ने की आदत कम होने का कारण क्या बताया गया है?
3. प्रतिदिन पुस्तकों के सार्थक समय बिताने से क्या लाभ होगा?
4. “ज्ञान” शब्द का पर्यायवाची गद्यांश के अनुसार कौन-सा है?
कविता (अंश): पवाज कहता शीश उठाकर, तुम भी ऊँचे बन जाओ। सागर कहता है लहराकर, मन में गहराई लाओ। समझ रहे हो क्या कहता है उठ–उठ धगर–धगर तरल तरंग भर लो भर लो अपने दिल में मीठी मीठी मद्रुलु उमंग! पृथ्वी कहती है क्या न छोड़ो कितना ही हो मसर पर भार, नभ कहता है फैलो इतना ढक लो तुम सारा संसार!
5. कविता “प्रकृति संदेश” में ‘सागर’ से कवि हमें क्या सीख लेने को कहता है?
6. कविता में पवाज का संदेश क्या है?
7. “सागर कहता है लहराकर” — यहाँ सागर किस गुण को अपनाने का संकेत देता है?
8. “उठ-उठ धगर-धगर तरल तरंग” किस जीवन-स्थिति का प्रतीक है?
वाक्य-वाकरण
9. “यदि तुम मन लगाकर पढ़ोगे तो परीक्षा में अवश्य सफल होगे।” यह वाक्य है-
10. “मोहन पढ़ाई करता है और सोहन खेलों में अच्छा है।” – यह वाक्य है:
11. “फल खाया जा रहा है।” यह किस वाच्य का उदाहरण है?
12. “आकाश में बादल छाए हुए हैं।” – इसमें “बादल” कौन-सा पद है?
13. “उसकी आवाज़ बिल्ली की तरह गूँज रही थी।” – यह कौन-सा अलंकार है?
14. ‘बत्सलोक’ किस प्रकार का समास है?
15. ई-मेल लेखन किस से सम्बन्धित है?
16. “पढ़ाई जीवन को उज्जवल बनाती है।” इसमें कौन-सा अलंकार है?
पाठ-संग्रह (अनुभाग)
यमूर्थांग पहुँचने के लिए हमें रात भर लायुंग में पड़ाव लेना पड़ा। गिगनचुंी पहाड़ों के बीच में साँस
लेती एक नन्हीं सी शांति बसी लायुंग। सारी दौड़-धूप से दूर जिंदगी वहाँ निश्चिन्त सो रही थी।
उसी लायुंग में हम ठहरे रहे। नित्य नदी के तीर पर बसे लकड़ी के एक छोटे-से घर में। मुँह-हार्तोकर मैं तुरन्त ही नदी के किनारे बिखरे पत्थरों पर बैठ गई थी। सामने बहुति ऊपर से बहता
झरना नीचे कल-कल बहती नदी में मिल रहा था। मध्यमर्म-मध्यमर्म हवा बह रही थी। पेड़-पौधे
झूम रहे थे। गहरे बादलों की परत ने चाँद को ढक रखा था… बाहर परिंदे और लोग अपने घरों को
लौट रहे थे। वातावरण में अद्भुत शांति थी। मन्दिर की घण्टियों-सी… घुंघरुओं की झुनझुनाहट-सी।
आँखें अनायास भर आईं।
17. लायुंग किस प्रकार की बस्ती बताई गई है?
- (क) भीड़-भाड़ वाली
- (ख) शांति और नन्हीं
- (ग) औद्योगिक
- (घ) आरम्भिक
18. उपर्युक्त गद्यांश में वातावरण की शांति की तुलना किससे की गई है?
- (क) शंखध्वनि से
- (ख) बांस की झनकार से
- (ग) मन्दिर की घंटियों और घुंघरुओं की झुनझुनाहट से
- (घ) समुद्र की लहरों से
कविता / श्लेष आदि (कविता अंश)
तुम्हारी यह दृष्टुरति मुस्कान मृतक में भी साल देगी जान मूल-रसूर तुम्हारे ये गाय... छोड़कर सालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे खिलास परस पाकर तुम्हारा ही प्राण, विघलकर हल बन गया होगा कठोर पाषाण
19. “मृतक में भी साल देगी जान” का क्या अर्थ है?
20. “मूल-रसूर तुम्हारे ये गाय” पंक्ति में “गाय” का अर्थ है—
अतरिक्त बहुविकल्पीय प्रश्न (21-30)
21. भोलानाथ किसको देखकर मुस्कुरा देता था?
22. उदय कृष्ण का कौन सा संदेश लेकर आए थे?
23. “राम-लक्ष्मण-पशुराम” संवाद में किस रस की प्रधानता है?
24. ‘उत्साह’ कविता में कवि ने बादल की तुलना किससे की है?
25. “यह दृष्टुरति मतुकान” कविता के कवि कौन हैं?
26. सिंह ने नागे की दीप में किसकी तस्वीर लगी हुई पायी थी?
27. फसल किसका गुणगान है?
28. ‘संगीकार’ का क्या अर्थ होता है?
29. मन्नू भंडारी कि हिंदी प्राध्यापिका का क्या नाम था?
30. हालदार साहब और चश्मेवाले में क्या समानता है?
खण्ड – ख (अति लघु उत्तरीय प्रश्न) — प्रश्न 31–38
31. गोपियों ने उदय को योग की शिक्षा कैसे लोगों को देने की बात कही है?
32. पाठ ‘नेत्रः का चश्मा’ में मनुजा के निम्नलिखित का क्या नाम था?
33. लेखिका ने यमूर्थांग की यात्रा के दौरान कौन-कौन से वृक्ष देखे?
34. कवि बादल को गरज कर बरसने के लिए क्यों कह रहा है?
35. नवाबी नवल के व्यवसायी ने लेखक को क्या देने की पेशकश की थी?
36. बचपन के दृश्यों में बस्तमल्ला खाँ शहनाई का रियायन कहाँ करते थे?
37. ‘एक कहानी यह भी’ पाठ के आधार पर बताइए कि लेखिका की दो साल बड़ी बहन का क्या नाम था?
38. ग़लत रास्ते से भटकने वाले गायक को कौन संभालता है?
खण्ड – ग (लघु उत्तरीय प्रश्न) — प्रश्न 39–46
39. माता का अंचल पाठ में बैजू तथा बच्चों ने किसे तथा क्यों चिढ़ाया ? उसका क्या परिणाम हुआ ?
‘माता का अँचल’ पाठ में बैजू और बच्चों ने गांव के बुजुर्ग मूसन तिवारी को चिढ़ाया क्योंकि बैजू बड़ा दीठ लड़का था। वे वृद्ध थे और उनको कम दिखाई देता था। बैजू उनको चिढ़ाकर बोला ‘बुढ़वा बेईमान माँगे करेला का चोखा’ सभी बच्चों ने बैजू के सूर में सूर मिलाकर यही चिल्लाना शुरू किया। परिणामस्वरूप मूसन तिवारी ने बेतहाशा खदेड़ा । सारे बच्चे भागकर बच गए। मूसन तिवारी ने पाठशाला पहुँचकर लेखक तथा बैजू की शिकायत की। बैजू भाग गया लेखक पकड़े गए फिर गुरुजी ने उनकी खूब खबर ली। लेखक के पिताजी को जब इस बात का पता चला तो वे लेखक को लेने विद्यालय पहुँचे और गुरुजी से उनकी ओर से क्षमा माँगकर उन्हें घर ले गये।
40. लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बतायीं?
लक्ष्मणु ने वीर योद्धाओं की निम्नलिखित विशेषताएँ बताई हैं:-
- लक्ष्मण कहते हैं शूरवीर युद्ध भूमि में युद्ध करते हैं। अपनी बड़ाई खुद अपने से नहीं करते।
- शत्रु को युद्ध में उपस्थित देखकर अपनी प्रशंसा करने के बजाय अपनी वीरता दिखाने में विश्वास करते हैं।
- जो वीर होते हैं उनमें धैर्य और क्षमा भी भरपूर होता है।
41. पानवाले और हालदार साहब की सोच में क्या अंतर है? स्पष्ट करें।
पानवाले और हालदार साहब की सोच में काफी अंतर था। पानवाले की सोच संकीर्ण है, वह दूसरों का उपहास करने वाला व्यक्ति था। इसलिए तो वह चश्मे वाले को गरीब फटेहाल बूढ़ा और लंगड़े के रूप में देखता था। जबकि हालदार साहब कैप्टन को महान और सच्चे देशभक्त के रूप में देखते थे जो देश और देश के लिए जान देने वालों का सम्मान करता था। पानवाले के लिए वह सनकी है जबकि हालदार साहब के लिए वह सच्चा देशभक्त है।
42. कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्या नहीं हट रही है?
फागुन का सौंदर्य अत्यधिक आकर्षक होता है। पेड़ और पौधों में नई-नई पत्तियां, नए-नए फूल लगे रहते हैं, चारों तरफ धरती में प्रकृति का सुंदर रूप नजर आता है। यही कारण है कि कवि इसके रूप सौंदर्य से मोहित हो गया है और उसकी सुंदरता से कवि की आंख हट नहीं रही है।
43. झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गांव लेखिका को किस तरह सम्मोद्धित कर रहा था?
44. ‘लखनवी अंदाज़’ पाठ में लेखक ने मुख्यतः किस पर व्यंग्य किया है?
लखनवी अंदाज पाठ में लेखक ने पतनशील सामंती वर्ग पर व्यंग्य किया है। उन्होंने इस पाठ के माध्यम से दिखावटी और बनावटी जीवन जीने वाले लोगों पर कटाक्ष किया है। उन्होंने देखा कि नवाबी नस्ल के उस व्यक्ति ने कैसे खीरे के फांको को सूंघकर फेंक दिया है यह केवल लेखक को दिखाने के लिए था।
45. लेखक ने अपने आप को ‘हिरोशिमा के विस्फोटक’ का भोक्कता और किस तरह महसूस किया?
46. ‘संगीकार’ जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा किन-किन क्षेत्रो में दिखाई देते हैं?
खण्ड – घ (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न) — प्रश्न 47–52
47. आपके क्षेत्र में बार-बार बिजली कटती है, इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
इस समस्या के समाधान हेतु विद्यालय विभाग के अधीक्षण अभियंता को एक आवेदन पत्र लिखिए।
आवेदन पत्र
सेवा में,
अधीक्षण अभियंता,
विद्यालय विभाग,
[आपके जिले का नाम]।
विषय: बार-बार बिजली कटने की समस्या के समाधान हेतु आवेदन।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे क्षेत्र में प्रतिदिन कई-कई बार बिजली कट जाती है। इस कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। शाम के समय जब विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं, तभी प्रायः बिजली चली जाती है। इसके कारण परीक्षा की तैयारी भी प्रभावित हो रही है।
अतः आपसे निवेदन है कि हमारे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति को नियमित किया जाए ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से हो सके।
आपकी अति कृपा होगी।
भवदीय,
[आपका नाम]
कक्षा – [आपकी कक्षा]
विद्यालय – [विद्यालय का नाम]
तारीख – [तारीख]
48. बालगोबिन भगत के व्यक्तित्व और उनकी वेशभूषा का अपने शब्दों में चित्रण प्रस्तुत कीजिए।
बाल गोविंद भगत मंझोले कद के गोरे- चिट्टे आदमी थे। उम्र 60 से ऊपर की थी। बाल पके हुए थे। लेबी दाढ़ी या जटा जूट नहीं थी। किंतु चेहरे पर सफेद दाढ़ी जगमगाती रहती थी। कपड़े काफी कम पहना करते थे, कमर में एक लंगोटी मात्रा। सिर पर कबीर-पंथियों सी टोपी पहनते थे। जाड़े के दिनों में काली कमली ओढा करते थे और मस्तक पर हमेशा चमकता हुआ रामानंदी चंदन लगा रहता था। गले में तुलसी की माला बंधी रहती थी। हरेक अवसर पर कबीर के पदों को हाथों में खंजड़ी लिए गाया करते थे। इस तरह से हम देखते हैं कि बाल गोविंद भगत का व्यक्तित्व भक्ति भाव में डूबे गायक भक्त की तरह था। उनके लिए भगवत भजन जीवन का आधार था। उनके गीतों को सुनने वाले भी मंत्रमुग्ध हो जाते थे; संग संग गीतों को गुनगुनाने और ताल पर नृत्य करने लगते थे।
इस प्रकार वह एक सशक्त व्यक्तित्व एवं स्पष्ट चरित्र के मालिक थे।
49. आत्मकथ्य कविता के माध्यम से प्रसाद जी के व्यक्तित्व की कौन-सी झलक मिलती है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
50. मन्नू भंडारी ने अपनी माँ के किन गुणों का उल्लेख अपनी आत्मकथा में किया है?
मन्नू भंडारी की माँ के अन्दर धरती से कुछ ज्यादा ही धैर्य और सहनशक्ति थी। वे पिताजी की हर ज्यादती को अपना प्राप्य और बच्चों की हर उचित अनुचित फरमाइश और जिद को अपना फर्ज समझकर बड़े सहज भाव से स्वीकार करती थी। उन्होंने जिंदगी भर अपने लिए कुछ नहीं माँगा और न कुछ चाहा। मन्नू भंडारी ने अपनी माँ की इन्हीं त्याग, सहिष्णुता एवं सहनशील आदि गुणों की चर्चा अपने आत्मकथा में की है।
51. दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 150 शब्दों में निबंध लिखिए:
(क) पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता: संकेत बिंदु — प्रदूषण, वृक्षारोपण का महत्व, जल संरक्षण, नियम-नागरूकता, निष्कर्ष।
आज मानव विकास की दौड़ में प्रकृति का संतुलन बिगड़ता जा रहा है। प्रदूषण दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है जिससे वायु, जल और भूमि सभी दूषित हो रहे हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। वृक्षारोपण का विशेष महत्व है क्योंकि वृक्ष न केवल हमें ऑक्सीजन देते हैं, बल्कि वर्षा और तापमान को भी नियंत्रित करते हैं। जल संरक्षण भी जरूरी है क्योंकि पानी जीवन का आधार है और इसका अपव्यय आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट पैदा कर सकता है। हमें पर्यावरण से जुड़े नियमों का पालन करना चाहिए और लोगों में जागरूकता फैलानी चाहिए। यदि हम अभी से सावधान नहीं हुए तो आने वाला समय बहुत कठिन होगा। अतः हर व्यक्ति को पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए, तभी पृथ्वी सुरक्षित और जीवन सुन्दर रहेगा।
(ख) डिजिटल शिक्षा का महत्व: संकेत बिंदु — परिभाषा, ऑनलाइन शिक्षा की उपयोगिता, लाभ व चुनौतियाँ, भविष्य की शिक्षा व्यवस्था, निष्कर्ष।
डिजिटल शिक्षा वह प्रणाली है जिसमें कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट आदि के माध्यम से अध्ययन किया जाता है। आज के समय में ऑनलाइन शिक्षा ने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। छात्र घर बैठे देश-विदेश के श्रेष्ठ शिक्षकों से ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। इससे समय और धन दोनों की बचत होती है। लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियाँ भी हैं जैसे—नेटवर्क की समस्या, आँखों पर असर और व्यावहारिक अनुभव की कमी। फिर भी, डिजिटल शिक्षा भविष्य की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है। यह शिक्षण को अधिक लचीला, सुलभ और आधुनिक बना रही है। निष्कर्षतः, डिजिटल शिक्षा ने सीखने के नए अवसर खोले हैं और यह भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
52. निम्न में से किसी एक का भाव स्पष्ट कीजिए:
(क)
लखन कहा हमस हमरे जाना।
सनुहु देव सब र्निषु समाना।।
का छनि लाभ उझून र्न उजनोरें।
देखा राम नयन के भोरें।।
यह पंक्तियाँ गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस से ली गई हैं। जब लक्ष्मण प्रभु श्रीराम के साथ वन में जा रहे होते हैं, तब वे अपने भाव व्यक्त करते हैं। लक्ष्मण कहते हैं कि “मैं अपने जीवन में केवल प्रभु राम को ही जानता हूँ, उनके सिवा मेरा कोई नहीं है।” वे देवताओं को संबोधित करते हुए कहते हैं कि संसार के सभी प्राणी मेरे लिए समान हैं, मेरे लिए सबसे बड़ा लाभ यही है कि मैं प्रभु श्रीराम के चरणों की सेवा कर सकूँ। मेरे नेत्रों का वास्तविक लाभ तभी है जब वे केवल श्रीराम के दर्शन करें।
भावार्थतः, यह पद भक्ति, त्याग और सेवा-भाव का अद्भुत उदाहरण है। लक्ष्मण का यह प्रेम दिखाता है कि सच्चा सुख भगवान की सेवा और उनके सान्निध्य में ही है।
(ख)
विकल विकल, उन्मन रहे उन्मन
विश्व के निदाघ के सकल दिन,
आए अज्ञात दृश्य से अनन्त के घन!
निप्त ररा, फल से कफर
शीश कर दो-
बदल, गरियो!
यह पंक्तियाँ आधुनिक कवि की रचना हैं, जिनमें कवि ने प्रकृति के माध्यम से जीवन की परिवर्तनशीलता को व्यक्त किया है। कवि कहता है कि संसार की तपती, विकल करने वाली गर्मी (कष्टमय समय) के बाद जब अनन्त आकाश से काले बादल उमड़ते हैं, तो पृथ्वी पर नया जीवन संचारित होता है। कवि इस परिवर्तन को देखकर उल्लास से भर उठता है और कहता है — “ओ बादलो! अब गरजो, बरसो, जीवन को तृप्त कर दो।”
भावार्थतः, यह कविता मानव जीवन के संघर्ष और आशा के प्रतीक रूप में प्रकृति के दृश्य को प्रस्तुत करती है। कठिनाइयों के बाद आशा की वर्षा अवश्य होती है।
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